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रैलियन आंदोलन

संदेश

सदियों से, जीव बीजस्थान एवं मूल जीवन के अर्थ की पृष्टि के लिए विद्वानों द्वारा दो मुख्य संभावनाओं पर बहस हो रही है. कुछ युक्तिवाद जिनकें उच्च तत्वज्ञानी आयाम है, वे इन्हें चार्ल्स डार्विन की विकास के सिद्धांत में ढूँढ नहीं सकते जबकि दुसरे जो एक सर्वशक्तिमान ईश्वरिय रूप की तर्कसंगत संधर्भ की सोच को सिरे से खारिज करती है.
लेकिन क्या हों अगर एक और सिद्धांत, जो उच्च तत्वज्ञानी और तर्कसंगत इन दोनों सोचकी गहराई को समजाता होगा, एवं ऐसा कोईभी दर्शनशास्त्र उपलब्ध होगा?
यही है “संदेश” का प्रस्ताव: हजारों साल पहले, किसी अन्य ग्रह से वैज्ञानिकों का एक समुह पृथ्वी पर आया था और जिन्होंने पृथ्वीपर संपूर्ण जीवन के रूपों का निर्माण किया, जिनमें मनुष्य प्राणी भी शामिल था, जिसे उन्होंनेेे अपनी खुद की छवि के आधार स्वरुप बनवाया. कई संस्कृतियों के प्राचीन ग्रंथों में इन वैज्ञानिकों और उनके काम के संदर्भ पाए जा सकते हैं. उनके अति उन्नत प्रौद्योगिकी के कारण, हमारे आदिम पूर्वजों द्वारा उन्हें देवताओं के रूप में माना जाता रहा अक्सर उन्हें 'Elohim-इलोहीम' के नाम से जाना गया जिसका प्राचीन हिब्रू में अनुवाद था, 'Those who came from the sky-जो लोंग आसमान से आए'.
बहुवचनी शब्द होने के बावजूद भी, Elohim-इलोहीम इस शब्द को समय के अंत के साथ 'God-गॉड' इस एकवचनी शब्द के साथ अशुद्ध अनुवादन कियां गया. जिसकें कई संधर्भ हमें अभी हमारे आधुनिक दिन के बाईबिल में प्रकट होते नजर आ रहे हैं.
फिर भी, ये लोंग जो आसमान से आए थे (the Elohim-इलोहीम) उन्होंने युगोयुगों तक मानवता को अपनें विभिन्न संदेशवाहक (जिन्हें पैगंबर भी कहा जाता है) की मदद से शिक्षित कियां एवं उनकें द्वारा वे लोंग हमारे संपर्कों में रहे. प्रत्येक पैगंबर को उसकें प्रचलित समय के समझने के स्तर अनुसार उपयुक्त संदेश दिए गए, जिनके द्वारा लोगों को चिंतनमनन के प्राथमिक उद्देश्य के साथ अहिंसा और सम्मान का बुनियादी सिद्धांत बताया-सिखाया गया जब कभी मानवता वैज्ञानिक समझ को समझनेके लिए एक पर्याप्त स्तर पर पहुंच जाएगीं, तब इलोहीम खुद को उडनतश्तरीओं के माध्यम से अधिक दिखाई देने लगेगा एवं अपने अंतिम संदेश को फैलानें का फैसला करेगा. रैल को दो मिशन दिए हुए हैं: पृथ्वी पर अपनें अंतिम संदेश के प्रसार का जिम्मा एवं हमारे रचनाकारों की वापसी का स्वागत करने के लिए पृथ्वीपर एक दूतावास बनानें की तैयारी का जिम्मा.

अनीश्वरवादी 'इंटेलिजेंट डिजाइन सिद्धांत' जो ईश्वरवादी और उत्क्रांतीवादीओं के बीच सदियों से होनेवाली पुरानी बहस को एक तर्कसंगत समाधान प्रदान करता है. यह न केवल आज के वैज्ञानिक खोजों के साथ सुसंगत नजर आती है, लेकिन बल्कि यह हमारी सभी संस्कृतियों के प्राचीन ऐतिहासिक खातों के साथ भी उतनीही लयबद्ध तरिकेसे सुसंगत नजर आती हैं.
लेकिन इसके लिए हमारे शब्दों पर भरोसा ना करे. खुद, स्वयं के लिए इंटेलिजेंट डिजाइन - डिजाइनर की ओर से संदेश पढ़े और अपना खुद का अनुसंधान करे.
हमारा आश्वासन है, इस के बाद आप दुनियां को आपके पुरानें नजरिए से कभी देख नहीं पाएंगे!